आधुनिक हिंदी साहित्य / Aadhunik Hindi Sahitya

बचे रहेंगे शब्द, बचा रहेगा जीवन

Saturday, 2 May 2015

चिड़िया की आँख - राकेश रोहित

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कविता चिड़िया की आँख - राकेश रोहित शर संधान को तत्पर व्यग्र हो रहे हैं धनुर्धर वे देख रहे हैं केवल चिड़िया की आँख! यह कैसा...
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Wednesday, 22 April 2015

लौटने की जगह - राकेश रोहित

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कविता लौटने की जगह - राकेश रोहित  जीवन के कुछ बारीक सत्य हमारे अंदर ही छुपे हुए हमारे दुख थे जिन्हें हम धूप दिखाने से डरते रहे ...
Wednesday, 1 April 2015

उदास लड़की, चन्द्रमा और गाने वाली चिड़िया - राकेश रोहित

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कविता उदास लड़की, चन्द्रमा और गाने वाली चिड़िया - राकेश रोहित  एक दिन चन्द्रमा ने लड़की से पूछा चित्र / के. रवीन्द्र  एक दिन चन्द...
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Tuesday, 10 March 2015

एक प्रार्थना, एक भय - राकेश रोहित

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कविता एक प्रार्थना , एक भय - राकेश रोहित “ कवियों में बची रहे थोड़ी सी लज्जा"*  -  मंगलेश डबराल की कविता पढ़ते हुए पहले प...
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Saturday, 28 February 2015

जिजीविषा - राकेश रोहित

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कविता जिजीविषा - राकेश रोहित डूबने वाले जैसे तिनका बचाते हैं मैं अपने अंदर एक इच्छा बचाता हूँ। कहने वालों ने नहीं बताया नूह...
Tuesday, 4 November 2014

एक सपना, एक जीवन - राकेश रोहित

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कविता एक सपना, एक जीवन  - राकेश रोहित  आदम हव्वा के बच्चे सीमाहीन धरती पर कैसे निर्बाध भागते होंगे पृथ्वी को पैरों में चिपकाये कैस...
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Thursday, 9 October 2014

गजब कि अब भी, इसी समय में - राकेश रोहित

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कविता गजब कि अब भी, इसी समय में  - राकेश रोहित गजब कि ऐसे समय में रहता हूँ कि खबर नहीं है उनको इसी देह में मेरी आत्मा वास करती है।...
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Monday, 1 September 2014

ऐसे तो मैं - राकेश रोहित

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कविता ऐसे तो मैं  - राकेश रोहित ऐसे तो मैं कविता लिखता हूँ                   जैसे अचानक भूल गया हूँ तुम्हारा नाम जैसे याद करना...
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Monday, 11 August 2014

इच्छा, आकाश के आँगन में - राकेश रोहित

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कविता   इच्छा, आकाश के आँगन में - राकेश रोहित इच्छा भी थक जाती है मेरे अंदर रहते- रहते यह मन तो लगातार भटकता रहता है आत्मा भी टह...
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Saturday, 2 August 2014

छतरी के नीचे मुस्कराहट - राकेश रोहित

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कविता छतरी के नीचे मुस्कराहट   - राकेश रोहित छतरी के नीचे मुस्कराहट थी जिसे उस लड़की ने ओढ़ रखा था , उसकी आँखें बारिश से भींगी...
Sunday, 20 July 2014

नील कमल की कविता अर्थात कलकत्ता की रगों में दौड़ता बनारस - राकेश रोहित

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पुस्तक समीक्षा नील कमल की कविता अर्थात कलकत्ता की रगों में दौड़ता बनारस - राकेश रोहित नील कमल  “ ऐसे भी शुरू हो सकती है ...
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Sunday, 8 June 2014

उन्माद भरे समय में कविता की हमसे है उम्मीद - राकेश रोहित

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कविता उन्माद भरे समय में कविता की हमसे है उम्मीद   - राकेश रोहित  बहुत कमजोर स्वर में पुकारती है कविता उन्माद भरा समय नहीं सुन...
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Sunday, 18 May 2014

कविता में उसकी आवाज - राकेश रोहित

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कविता   कविता में उसकी आवाज - राकेश रोहित वह ऐसी जगह खड़ा था जहाँ से साफ दिखता था आसमान पर मुश्किल थी खड़े होने की जगह नहीं थी ...
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Sunday, 11 May 2014

एक दिन वह निकल आयेगा कविता से बाहर - राकेश रोहित

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कविता   एक दिन वह निकल आयेगा कविता से बाहर - राकेश रोहित  हारा हुआ आदमी पनाह के लिए कहाँ जाता है , कहाँ मिलती है उसे सर टिकाने की...
Friday, 2 May 2014

बदलते मनुष्य का रंग विचार की तरह नहीं होता - राकेश रोहित

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कविता बदलते मनुष्य का रंग विचार की तरह नहीं होता - राकेश रोहित  यह देखो- हरा , उन्होंने कहा मैंने देखा वो पत्तियाँ थीं और मुझे उ...
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Sunday, 13 April 2014

संवेदनाओं के द्वीप और विभ्रम की उलझनें - राकेश रोहित

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पुस्तक समीक्षा /  एक नौसिखुआ आलोचक के रफ नोट्स संवेदनाओं के द्वीप और विभ्रम की उलझनें        - राकेश रोहित विमलेश त्रिपाठी  ...
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आधुनिक हिंदी साहित्य से परिचय और उसकी प्रवृत्तियों की पहचान की एक विनम्र कोशिश
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