आधुनिक हिंदी साहित्य / Aadhunik Hindi Sahitya

बचे रहेंगे शब्द, बचा रहेगा जीवन

Sunday, 27 September 2015

वे तितली नहीं मांग रहीं... - राकेश रोहित

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पुस्तक समीक्षा वे तितली नहीं मांग रहीं... - राकेश रोहित कृष्णा सोबती  एक रचना कहीं-न-कहीं अस्तित्व की तलाश होती है क्यो...
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Wednesday, 16 September 2015

कवि, पहाड़, सुई और गिलहरियां - राकेश रोहित

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कविता कवि, पहाड़, सुई और गिलहरियां - राकेश रोहित पहाड़ पर कवि घिस रहा है सुई की देह आवाज से टूट जाती है गिलहरियों की नींद! ...
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Thursday, 10 September 2015

सुमन प्रसून तुमको सुनते हुए - राकेश रोहित

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कविता सुमन प्रसून तुमको सुनते हुए - राकेश रोहित वह सामने कविता पढ़ रही थी कविता पढ़ते हुए हिलती थी उसकी गर्दन और शब्द रूक कर देख...
Wednesday, 2 September 2015

दो कविताएँ : प्यार और ब्रेकअप - राकेश रोहित

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(नोट: दो कविताएँ हैं। पहली कविता प्यार के लिए और दूसरी ब्रेकअप की कविता! आपकी राय की प्रतीक्षा रहेगी दोनों में से कौन आपको अधिक पसंद ह...
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Saturday, 8 August 2015

एक कविता उसके लिए जिसे मैं नहीं जानता हूँ - राकेश रोहित

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कविता   एक कविता उसके लिए जिसे मैं नहीं जानता हूँ - राकेश रोहित इस विराट विश्व में मैं मनुष्य की तरह प्रवेश करता हूँ 31 दिसंबर...
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Saturday, 1 August 2015

मुझे ले चल पार - राकेश रोहित

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कविता मुझे ले चल पार - राकेश रोहित नाव देखते ही लगता है जैसे हम डूब गए होते अगर यह नाव नहीं होती डगमग डोलती है नाव और संग डोलता...
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Wednesday, 22 July 2015

पीले फूल और फुलचुही चिड़िया - राकेश रोहित

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कविता पीले फूल और फुलचुही चिड़िया - राकेश रोहित वो आँखें जो समय के पार देखती हैं मैं उन आँखों में देखता हूँ। उसमें बेशुमार फूल ख...
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Friday, 10 July 2015

समय के बारे में एक कविता - राकेश रोहित

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कविता समय के बारे में एक कविता - राकेश रोहित किसी समय को जानने के कई तरीके हैं उनमें से एक यह है कि आप जानें कि कौन सो रहा है और ...
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Thursday, 9 July 2015

कविता नहीं यह - राकेश रोहित

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कविता   कविता नहीं यह - राकेश रोहित   मेरे पास नहीं हैं उतनी कविताएँ  जितने धरती पर अनदेखे अनजाने फूल हैं आकाश में न गिने गये ...
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Saturday, 4 July 2015

अँधेरी खिड़कियों के अंदर का अँधेरा - राकेश रोहित

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पुस्तक समीक्षा / पहला उपन्यास अँधेरी खिड़कियों के अंदर का अँधेरा - राकेश रोहित अनिरुद्ध उमट  अनिरुद्ध उमट उन रचनाकारो...
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Friday, 19 June 2015

एक कविता पेड़ के लिए - राकेश रोहित

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कविता एक कविता पेड़ के लिए - राकेश रोहित वह छोटे पत्तों और बड़ी छायाओं वाला पेड़ था जिसकी छांव में ठहरी थी चंचल हवा और वही...
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Thursday, 4 June 2015

सुबह होने से कुछ क्षण पहले की कविता - राकेश रोहित

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कविता सुबह होने से कुछ क्षण पहले की कविता - राकेश रोहित उनका अपनी बातों पर जोर है इतना जोर दे कर कहते हैं वे अपनी बातों की बात...
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