कविता
समय के बारे में एक कविता
- राकेश रोहित
किसी समय को जानने के कई तरीके हैं
उनमें से एक यह है कि आप जानें
कि कौन सो रहा है
और जाग कौन रहा है?
माँ जानती है जब सो रहा है बच्चा
तो चुपके से चूल्हे पर अदहन चढ़ा देने का
और बासी रोटी
नमक प्याज के साथ गिल लेने का समय है।
बाहर आवारा घूम रहा लड़का
जो फिर- फिर हार जाता है कर नौकरी का जुगाड़
जानता कब पिता के सोने का वक्त है
और कब माँ के जागने का
कि कब उसे प्रवेश करना है पिछले दरवाजे से
अपने ही घर में अनधिकृत
और चुपके से पूछना है
माँ कुछ खाने को है?
इस समय वह कभी माँ का चेहरा नहीं देखता
इस समय माँ कभी उसका चेहरा नहीं देखती
और चाह कर भी बता नहीं पाती
कि जाग रहे हैं पिता अब भी
कि यह पानी का गिलास उन्हीं के लिए है।
पिता को भी पता होता है
कि अब सो गया होगा उनका बेटा
खाकर माँ के हिस्से का भी खाना
जब उठ कर पीते हैं गिलास भर पानी
कहना नहीं भूलते
सो गई क्या?
सोचते हैं कल फिर साहब को कह कर देखें
कुछ तो जुगाड़ लगा दें इस नालायक का!
वैसे पिता को पता है
लाख जतन करें
साहब को ठीक खबर हो जाती है उनके आने की
चाहे जो भी समय हो
दरबान यही कहता है साहब सो रहे हैं
बहुत दिनों से उनकी इच्छा हो रही है
कि एक दिन दरबान को गले लगाकर बोलें
क्या भाई इस ठेठ दुपहरिया
जब जाग रहे हैं चिरई चुनमुन
और खदक रहा चूल्हे पर अदहन
जब सूरज माथे पर चमक रहा है
तेरे साहब सो रहे हैं?
ऐसे समय जब भरी- दोपहरी सो जाते हैं लोग
लाखों लोग जाग कर इंतजार करते हैं
कि एक दिन सोये हुए लोग
उनके पक्ष में उनके भाग्य का फैसला लिखेंगे
और तब तक वे चिड़ियों को अपने सपनों की कथा कहें!
बच्चे को ठीक पता होता है
कि कब तक सोती रहेगी राजकुमारी
और कब होगा कहानी में राक्षसों का प्रवेश
हर बार नये उत्साह से वे
पुराने राजकुमारों के आगमन पर उल्लसित होते हैं
और हर बार नानी जान जाती है
कि कब बच्चे को नींद आ गयी है!
और एक दिन बच्चे की आँखों का सपना
नानी की आँख में आ जाता है
तब नानी गाने लगती है कोई अनसुना गीत
और कच्ची नींद से जाग कर माँ देखती रहती है
आँख भर नानी की आँख।
इस समय जानना कठिन होता है
कि माँ जाग रही है
या माँ के भीतर कोई छूट गया समय जाग रहा है?
तो दोस्तों,
यह समय जो सोने और जागने वालों से जाना जाता है
इसमें कुछ अद्भुत बातें होती हैं
जैसे सोने वालों के पास नींद नहीं होती
और जागने वालों के पास सपना होता है!
किसी समय को जानने के कई तरीके हैं
उनमें से एक यह है कि आप जानें
कि किसके पास सपने हैं
और सपने चुरा कौन रहा है?
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| चित्र / के. रवीन्द्र |
